सोमवार को देहरादून में दून पुस्तकालय में लेखिका एवं कवयित्री ज्योत्सना जोशी की दो पुस्तकें “दादी का रेडियो” (संस्मरण) और “ठहरे किनारे” (काव्य संग्रह) का लोकार्पण हुआ। इस कार्यक्रम में साहित्यकार डॉ. सुरेंद्र दत्त सेमल्टी ने इस पुस्तक की विवेचना की। साथ ही शिक्षाविद डॉ. उमा भट्ट ने उनके काव्य संग्रह की समीक्षा की और वरिष्ठ साहित्यकार मुकेश नौटियाल ने अपने विचार रखे।
बता दें कि लेखिका ज्योत्सना जोशी ने कहा कि वह अपनी दादी को याद कर अपने बचपन की यादों को संजोए हुए शब्दों में ढाल कर इस पुस्तक की संरचना की। उन्होंने कहा कि उनकी दादी की यादें हमेशा उनके साथ रहती हैं और आज भी वह दादी को याद कर रेडियो रोज सुना करती हैं। साथ ही उन्होंने अपने प्रकाशक प्रवीण भट्ट को धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने अपनी काव्य संग्रह ठहरे किनारे की एक खूबसूरत सी कविता सुनाते हुए अपनी बात समाप्त किया।
वहीं इस कार्यक्रम में कवयित्री कांता घिल्डियाल ने ज्योत्सना जोशी की एक अंतर्मन को छू लेने वाली कविता सुनाई। साथ ही मधुरवादिनी तिवारी ने अपनी सुनार सी रचना “अधूरी कविता” सुनाई। आपको बता दें कि कार्यक्रम का संचालन कवियित्री निक्की पुष्कर ने किया।
इस कार्यक्रम में विष्णु तिवारी, कविता बिष्ट, भारती आनंद, जे पी मैठाणी, चंद्रशेखर तिवारी, कुलदीप रावत, विवेक श्रीवास्तव सहित अन्य लोग मौजूद रहें।

