रविवार को देहरादून की 50 वर्ष पुरानी संस्था प्रगतिशील क्लब में काव्यगोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें देहरादून के कवियों और साहित्यकारों ने बढ़ चढ़ कर प्रतिभाग किया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रपति से सम्मानित वरिष्ठ लेखक कवि जयंती प्रसाद नौटियाल ने किया और मुख्य अतिथि राष्ट्रपति से सम्मानित वरिष्ठ लेखक, कवि, गीतकार, संगीतकार, चित्रकार और मूर्तिकार ज्ञानेन्द्र कुमार रहे।
बता दें कि संस्था के अध्यक्ष पीयूष भटनागर ने संस्था का परिचय देते हुए कहा कि यह संस्था 1976 में शुरू की गई थी तब से अब तक संस्था साहित्य की सेवा कर रही है। साथ ही उन्होंने बताया कि पिछले 32 वर्षों से प्रतिवर्ष संस्था एक साहित्यकार को बसंत श्री का सम्मान देती है। हर महीने के दूसरे रविवार को संस्था काव्य गोष्ठी आयोजित करती है। उन्होंने बताया कि इस महीने के काव्यगोष्ठी के आयोजक डॉ. अनिल शास्त्री थे जो किसी आवश्यक कार्य के कारण इस बार उपस्थित नहीं हो पाए परन्तु अपने आयोजक होने का दायित्व अवश्य निभाए।
वहीं इस कार्यक्रम में सभी कवियों ने अपनी अपनी सर्वश्रेष्ठ रचनाएं सुनाई। जिसमें कवि नरेंद्र शर्मा के व्यंग, सुभाष वर्मा के भक्ति रस, सुनील दत्त बेदार के गीत, नवीन आजम और रईस अहमद फिग़ार की शायरी, शौहर जलालाबादी के चुटकुली अंदाज, शिव चरण शर्मा के ग़ज़ल, दीपक अरोड़ा के पंजाबी अंदाज, मोनिका मंतशा के सुरीली आवाज, रविन्द्र सेठ के व्यंग, संजय प्रधान की कविता, डॉ. राजेश डोभाल के खूबसूरत गीत के साथ विवेक श्री के हास्य ने सबके मन मोह लिए।
ऐसे में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ने अपनी सर्वश्रेष्ठ रचना दुख चंदन होता है सुना कर सभी को सोचने पर विवश कर दिया। साथ ही कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जयंती प्रसाद नौटियाल ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन ने सबकी रचनाओं को समीक्षा करने के साथ अपनी एक छोटी सी रचना सुनाई।
इस कार्यक्रम में कवियों साहित्यकारों के साथ अन्य लोग मौजूद रहें।

