कैदियों में सकारात्मक बदलाव की पहल, देहरादून जेल में समिति ने बांटी श्रीमद्भगवद्गीता

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सोमवार को सामाजिक संस्था जन जागरण अभियान समिति द्वारा देहरादून कारागार में बंद कैदियों में अच्छे संस्कार जागृत करने के उदेश्य से “श्रीमद्भागवत गीता वितरण” और गीता के श्लोकों को धर्माचार्यों द्वारा उसका भावार्थ बताया गया साथ उच्च अधिकारियों द्वारा उन्हें जीवन का मूलमंत्र देने हेतु शिविर का आयोजन किया गया । इस कार्यक्रम की शुरुआत सभी अतिथियों ने दीप जला कर किया।

बता दें कि संस्था के इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पधारे उप महानिरीक्षक जेल दधिराम मौर्य ने कहा कि यह कार्यक्रम बंदी भाइयों के चारित्रिक निर्माण, नैतिक उत्थान एवं सकारात्मक जीवन दृष्टि विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की श्रेष्ठ कला सिखाने वाला प्रेरणास्रोत है। गीता के उपदेश व्यक्ति को सत्य, कर्तव्य, अनुशासन, आत्मसंयम और कर्मयोग का मार्ग दिखाते हैं। यदि बंदी भाई गीता के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाएँ, तो वे समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक पुनः स्थापित होकर एक आदर्श नागरिक के रूप में नया जीवन प्रारंभ कर सकते हैं।

वहीं अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित जेल अधीक्षक पवन कोठारी ने कहा कि जनजागरण अभियान समिति द्वारा आयोजित श्रीमद्भगवद्गीता वितरण कार्यक्रम एक अत्यंत सराहनीय एवं प्रेरणादायी पहल है। उन्होंने कहा कि गीता का ज्ञान व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच, अनुशासन एवं नैतिक मूल्यों का विकास करता है। ऐसे कार्यक्रम बंदी भाइयों को आत्मचिंतन का अवसर प्रदान करते हैं और उन्हें जीवन में नई दिशा एवं बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने संस्था के इस सामाजिक एवं आध्यात्मिक प्रयास की प्रशंसा करते हुए आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी इस प्रकार के जनहितकारी कार्यक्रम निरंतर आयोजित होते रहेंगे।

साथ ही बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित आचार्य डॉ. बिपिन जोशी ने अपने उद्बोधन की शुरुआत पवित्र “ॐ” ध्वनि के उच्चारण से करते हुए श्रीमद्भगवद्गीता के विभिन्न श्लोकों की सरल एवं प्रेरणादायी व्याख्या की। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता मानव जीवन का सर्वोत्तम मार्गदर्शक ग्रंथ है, जो व्यक्ति को धर्म, कर्म, आत्मसंयम, कर्तव्यनिष्ठा और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि गीता का संदेश किसी एक वर्ग या धर्म तक सीमित नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण का संदेश है। आचार्य जोशी ने बंदी भाइयों से आह्वान किया कि वे गीता के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाकर आत्मपरिवर्तन का संकल्प लें, क्योंकि जब विचार बदलते हैं तो जीवन की दिशा भी बदल जाती है। उन्होंने कहा कि गीता का नियमित अध्ययन मन को शांति, आत्मबल और सही निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करता है, जिससे व्यक्ति जीवन की हर चुनौती का धैर्यपूर्वक सामना कर सकता है।

ऐसे में संस्था के संस्थापक एवं अध्यक्ष स्वप्निल सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि जनजागरण अभियान समिति का उद्देश्य समाज में नैतिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों का प्रसार करना है। इसी उद्देश्य को लेकर संस्था द्वारा जिला कारागार में श्रीमद्भगवद्गीता वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि गीता का संदेश बंदी भाइयों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में सहयोग प्रदान करने के लिए जेल प्रशासन, सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों का हृदय से आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया।

कार्यक्रम का प्रभावी एवं गरिमापूर्ण संचालन संस्था के सचिव विवेक श्रीवास्तव ने किया। उन्होंने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा अंत में सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

आपको बता दे। कि कार्यक्रम में विशेष सहयोग देने वाले समाजसेवी विनीत श्रीवास्तव, आयुष्मान गुप्ता और अमित खेरा को सम्मानित किया गया।

इस दौरान संस्था के अउपाध्यक्ष प्रमोद बेलवाल, धनंजय कुकरेती , विजय शुक्ला, मिसेज खेरा सहित अन्य लोग मौजूद रहें।

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