गुरुवार को हिमालय की अनुपम प्राकृतिक धरोहर बुग्यालों के संरक्षण, संवर्धन एवं जन-जागरूकता के उद्देश्य से संस्कृति विभाग सभागार, देहरादून में बुग्याल संरक्षण दिवस–2026 के अवसर पर भव्य समारोह एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन मैती संस्था एवं उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। संगोष्ठी का विषय “उत्तराखंड के अल्पाइन घास के मैदानों (बुग्यालों) का संरक्षण : वैज्ञानिक दृष्टिकोण, पारंपरिक ज्ञान एवं संरक्षण” रहा। इस मौके पर साहित्य एवं सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवयित्री कविता बिष्ट ‘नेह’ को ‘मैती सम्मान–2026’ से सम्मानित किया गया।
बता दें कि समारोह में सूबे के वन मंत्री सुबोध उनियाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं कविता बिष्ट ‘नेह’ ने कहा कि अपने गुरु पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ‘मैती’ की संस्था द्वारा उन्हीं के स्नेह एवं आशीर्वाद के साथ सम्मानित होना उनके लिए अत्यंत गौरव और सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि साहित्य, समाज और प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को और अधिक निष्ठा से निभाने की प्रेरणा है। उन्होंने अपने गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनका दशकों का समर्पण समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके द्वारा प्रारंभ किया गया ‘मैती’ आंदोलन प्रकृति संरक्षण को सामाजिक एवं मानवीय संवेदनाओं से जोड़ने का अनुपम उदाहरण है।
साथ ही कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अनेक विद्वानों एवं विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान बुग्यालों के संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए सामूहिक संकल्प भी लिया गया। वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, पर्यावरणविदों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं प्रकृति-प्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी बनाया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने बुग्यालों की पारिस्थितिकी, जैव-विविधता, जलस्रोतों, पर्यावरणीय संतुलन तथा लोक-परंपराओं में उनके महत्व पर प्रकाश डाला। वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान को संरक्षण का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए बुग्यालों को सुरक्षित रखने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया।
ऐसे में कवयित्री ने कहा कि बुग्याल केवल उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता नहीं, बल्कि हिमालय की जैव-विविधता, जलस्रोतों, पर्यावरणीय संतुलन और हमारी लोक-संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने इस गरिमामयी आयोजन के लिए मैती संस्था एवं सभी आयोजकों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि गुरुदेव के सान्निध्य में प्राप्त यह सम्मान उन्हें प्रकृति, समाज और साहित्य के क्षेत्र में और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता रहेगा। साथ ही उन्होंने अपने गुरु को आभार भी व्यक्त किया।
इस सम्मान समारोह में पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ‘मैती’, वन मंत्री सुबोध उनियाल, पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, प्रोफेसर दुर्गेश पंत, पद्मश्री अनूप साह, पद्मश्री जागर गायिका बसंती बिष्ट तथा पीसीसीएफ उत्तराखंड पटनायक सहित अनेक लोग रहे।
